रस्ट


Alternate / Local Name:
रस्ट, रतुआ, गेरूई

Short Description:
गेहूं की पत्तियों का रंग पीला पड़ रहा है और वे गिर रहीं हैं तो इसे हल्के में न लें। हो सकता है, फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाले गेरुई (रस्ट) रोग ने उसे अपनी जद में ले लिया हो। गेरुई रोग (रस्ट) तीन प्रकार का होता है। यह रोग फसल को पचास फीसद तक नुकसान पहुंचा सकता है।
AFFECTED CROPS

Name Image Stages Periods Symptoms
गेहूँ Tillering stages जनबरी से मार्च तक यह रोग पाया जाता है | इस रोग के लक्षण प्रारम्भ में पत्तियों के उपरी सतह पर पीले रंग की धारियों के रूप में देखने को मिलते हैं जो धीरे-धीरे पूरी पत्ती पर फैल जाती हैं। इसलिए इसे धारीदार रतुआ भी कहते हैं और पत्तियों को छूने पर यह हल्दी जैसा पाउडर हाथों पर लग जाता है। इस रोग से संक्रमित खेतों में प्रवेश करने पर यह पीले रंग का पाउडर कपड़ों पर भी लग जाता है।
गेहूं Vegetative stages फरबरी से मार्च तक यह रोग पाया जाता है पोस्ट्यूल गोलाकार या थोड़ा अण्डाकार होते हैं, जो स्टेम रस्ट की तुलना में छोटे होते हैं, आमतौर पर, आपस में नहीं जुड़ते हैं, और नारंगी से लेकर नारंगी-भूरे रंग के यूरेडियोस्पोर्स तक होते हैं।संक्रमण स्थल मुख्य रूप से पत्तियों और पत्ती के आवरण की ऊपरी सतहों पर और कभी-कभी गर्दन और आंवों पर पाए जाते हैं
गेहूं Reproductive stage फरवरी से मार्च तक यह रोग पाया जाता है पोस्ट्यूल गोलाकार या थोड़ा अण्डाकार होते हैं, जो स्टेम रस्ट की तुलना में छोटे होते हैं, आमतौर पर, आपस में नहीं जुड़ते हैं, और नारंगी से लेकर नारंगी-भूरे रंग के यूरेडियोस्पोर्स तक होते हैं।संक्रमण स्थल मुख्य रूप से पत्तियों और पत्ती के आवरण की ऊपरी सतहों पर और कभी-कभी गर्दन और आंवों पर पाए जाते हैं
मूंग Reproductive stage यह रोग जुलाई से सितम्बर मे पाया जाता है पतियों के ऊपर हल्के छोटे छोटे पीले रंग के दब्बे दिखाई देते है इसके प्रभाब मे पती सुकड़ और मुड जाती है
मूंग Vegetative stages यह रोग जुलाई से सितम्बर मे पाया जाता है इस रोग का प्रकोप पौधों के सभी वायवीय भागों पर हो सकता है | इसमें सर्वप्रथम पत्तियों की निचली सतह पर छोटे – छोटे सफेद बिंदु देते हैं जो बाद में बड़ा सफेद धब्बा बना लेता हैं | रोग की तीव्रता के साथ सफेद धब्बों का आकार भी बढ़ता जाता है |
मूंगफली Reproductive stage यह रोग जुलाई से सितम्बर मे पाया जाता है इस रोग का प्रकोप पौधों के सभी वायवीय भागों पर हो सकता है | इसमें सर्वप्रथम पत्तियों की निचली सतह पर छोटे – छोटे सफेद बिंदु देते हैं जो बाद में बड़ा सफेद धब्बा बना लेता हैं | रोग की तीव्रता के साथ सफेद धब्बों का आकार भी बढ़ता जाता है |

पीला रतुआ रोग गेहूं के सबसे खतरनाक और विनाशकारक रोगों में से एक है। इसे धारीदार रतुआ भी कहते हैं जो पक्सीनिया स्ट्राईफारमिस नामक कवक से होता है। पीला रतुआ फसल की उपज में शत प्रतिशत नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। इस बीमारी से उत्तर भारत में गेहूं की फसल का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही प्रभावित होती है।

इस रोग के लक्षण प्रारम्भ में पत्तियों के उपरी सतह पर पीले रंग की धारियों के रूप में देखने को मिलते हैं जो धीरे-धीरे पूरी पत्ती पर फैल जाती हैं। इसलिए इसे धारीदार रतुआ भी कहते हैं और पत्तियों को छूने पर यह हल्दी जैसा पाउडर हाथों पर लग जाता है। इस रोग से संक्रमित खेतों में प्रवेश करने पर यह पीले रंग का पाउडर कपड़ों पर भी लग जाता है।

गेरुई रोग से बचाव के लिए किसान प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी, मैंकोजेब 75 प्रतिशत, जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी, जिरम 80 प्रतिशत, थायोफनेट मिथाइल 70 प्रतिशत में घोल तैयार कर छिड़काव कर सकते हैं।