मूंग


Short Description:
यह भारत की मुख्य दालों में से एक है। यह प्रोटीन के साथ-साथ रेशे और लोहे का मुख्य स्त्रोत है। इसे खरीफ फसल के तौर पर उगाया जा सकता है। इसे हरी खाद के फसल के तौर पर प्रयोग किया जाता है। यह शुष्क ज़मीनों पर खेती करने के लिए लाभदायक फसल है क्योंकि यह सूखे की स्थितियों को सहनेयोग्य फसल है।

Climate:
वर्षा-60-90 मिमी बुवाई का तापमान-25-30°C कटाई का तापमान-30-35°C

Soil Type:
इसकी खेती मिट्टी की व्यापक किस्मों में की जा सकती है। यह अच्छे निकास वाली दोमट से रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है। नमक और जल जमाव वाली मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती।
Soil Treatment:
इसके उपयोग के लिए 8 -10 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद लेते हैं तथा इसमें 2 किलो ट्राईकोडर्मा विरिडी और 2 किलो ब्यूवेरिया बेसियाना को मिला देते हैं एवं मिश्रण में नमी बनाये रखते हैं. यह क्रिया में सीधी धूप नहीं लगनी चाहिए. अतः इसे छाव या पेड़ के नीचे करते हैं. नियमित हल्का पानी देकर नमी बनाये रखना होता है

Seed Treatment:
बीज का उपचार बिजाई से पहले, कप्तान या थीरम 3 ग्राम या थीरम 2.5 ग्राम+कार्बेनडाज़िम 1 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें।
Seed Rate:
बिजाई के लिए एक एकड़ खेत में 8-10 किलो बीज पर्याप्त होते हैं।

Time of Sowing:
बिजाई का समय गर्मियों के मौसम में 10 मार्च से 10 अप्रैल तक बिजाई पूरी कर लें। तराई क्षेत्रों के लिए मार्च में बिजाई पूरी कर लें।
Method of Sowing:
बिजाई का ढंग बिजाई के लिए बिजाई वाली मशीन, पोरा या केरा ढंग का प्रयोग किया जाता है।

Fertilizers :
नाइट्रोजन 4-6 किलो (10-13 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (100 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और सल्फर 6 किलो प्रति एकड़ में बिजाई के समय डालें। खादों को बीज के नीचे 2-3 सैं.मी. की गहराई पर डालें।
Water Requirements :
मिट्टी की किस्म, जलवायु और अन्य तत्वों के आधार पर हरी मूंग को तीन से चार सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। बिजाई के 30-35 दिनों के बाद पहली सिंचाई करें। उसके बाद, बाकी की सिंचाई आवश्यकता के आधार पर 15 दिनों के अंतराल पर करें।
Harvest Time:

Weeds:

Weeds Symptoms:

Weeds Management:
खेत को नदीन मुक्त रखें, एक या दो गोडाई करें। पहली गोडाई बिजाई के चार सप्ताह बाद करें और दूसरी गोडाई पहली गोडाई के दो सप्ताह बाद करें। रासायनिक तरीके से नदीनों को ख्त्म करने के लिए फलूक्लोरालिन 600 मि.ली. और ट्राइफलूरालिन 800 मि.ली बिजाई के समय या पहले प्रति एकड़ में डालें। बिजाई के बाद दो दिनों में पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 100 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें।
Diseases:
1- पीला चितकबरी (मोजेक) रोग 2- चूर्णी फफूंद रोग 3- सरकोस्पोरा पत्र बुंदकी रोग

Diseases Symptoms:
1- पीला चितकबरी (मोजेक) रोग : यह सफेद मक्खी के कारण फैलता है। जिससे पत्तों और पीले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। प्रभावित पौधे पर फलियां नहीं बनती। 2- चूर्णी फफूंद रोग : इस रोग में पौधों की निचली पत्तियों पर गहरे धब्बे पड़ जाते हैं और बाद में पत्तों पर छोटे-छोटे सफेद बिंदु दिखाई देने लगते हैं. बाद में ये छोटे सफेद बिंदु बड़े सफेद धब्बे बन जाते हैं | 3- सरकोस्पोरा पत्र बुंदकी रोग : यह मूंग की फसल में लगने वाला एक खास रोग है जिसके प्रकोप से पैदावार में काफी नुकसान होता है. इसमें पत्तियों पर भूरे गहरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं |

Diseases Management:
1- पीला चितकबरी (मोजेक) रोग : इसकी रोकथाम के लिए 40 ग्राम थाइमैथोक्सम और ट्राइज़ोफॉस 600 मि.ली. की प्रति एकड़ में स्प्रे करें। आवश्यकतानुसार पहली स्प्रे के 10 दिनों के बाद दूसरी स्प्रे करें। 2- चूर्णी फफूंद रोग : यदि इसका हमला दिखे तो ज़िनेब 75 डब्लयु पी 400 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें। 10 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें। 3- सरकोस्पोरा पत्र बुंदकी रोग : इस रोग से बचाने के लिए बुवाई से पहले कैप्टन या थिरम कवकनाशी से बीज को जरूर उपचारित करें.
Insects / Pests:
1- रस चूसने वाले कीड़े (हरा तेला, चेपा और सफेद मक्खी) : 2- फली छेदक :

Insects / Pests Symptoms:
1- रस चूसने वाले कीड़े (हरा तेला, चेपा और सफेद मक्खी) : रसचूसक कीट या थ्रिप्स कहलाने वाले कीट मूंग के पौधों का रस चूसकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं. इसके प्रकोप से पौधे पीले, कमजोर हो जाते हैं. उनमें विकार भी आ जाता है. 2- फली छेदक : यह गंभीर कीट है जिसके कारण उपज में भारी नुकसान होता है।

Insects / Pests Management:
1- रस चूसने वाले कीड़े (हरा तेला, चेपा और सफेद मक्खी) : सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए थाइमैथोक्सम 40 ग्राम या ट्राइज़ोफॉस 600 मि.ली. की प्रति एकड़ में स्प्रे करें। यदि जरूरत पड़े तो पहली स्प्रे के 10 दिनों के बाद दूसरी स्प्रे करें। 2- फली छेदक : यदि इसका हमला दिखे तो इंडोएक्साकार्ब 14.5 एस सी 200 मि.ली. या एसीफेट 75 एस पी 800 ग्राम या स्पिनोसैड 45 एस सी 60 मि.ली. की प्रति एकड़ में स्प्रे करें। दो सप्ताह बाद दूसरी स्प्रे करें।
Nutrients:

Nutrients Deficiency Symptoms:

Nutrients Deficiency Management: