Name | Image | Stages | Periods | Symptoms |
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गेहू | ![]() |
Vegetative stages | फरबरी से मार्च तक यह रोग पाया जाता है | गहरा लाल भूरा - पत्तियों के दोनों किनारों पर, तनों पर और स्पाइक्स पर होता है |
धान | ![]() |
Reproductive stage | जून से जुलाई तक यह रोग पाया जाता है | पत्तियों के पूरे भाग को झुलसा देते हैं |
मूंग | ![]() |
Vegetative stages | जुलाई मे यह रोग पाया जाता है | पत्ती की सतह पर भूरे रंग के धब्बे दिखाइ देते है। प्रारंभिक अवस्था में ये धब्बे गोल एवं छोटे भूरे रंग के होते है। |
1-यदि हवा में नमी कम हो और तापमान 25 से 30 डिग्री हो जाए। 2.बहुत अधिक वर्षा होने से खेत में पानी भर जाता है या वर्षा बहुत कम होने से खेत में खुश्की हो। 3.धान की रोपाई बहुत नजदीक की गई हो, जिससे पौधों की बढ़वार अधिक हो जाती है। 4. नाइट्रोजन एवं अन्य उर्वरको की मात्रा अधिक प्रयोग करने से बढ़वार हो गई हो।
इस रोग के लक्षण पौधे के सभी भागों में पाये जाते हैं तथा पत्तियों पर इसका प्रभाव बहुत अधिक देखने को मिलता है. शुरू में इस रोग के लक्षण भूरे रंग के नाव के आकार के छोटे धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं जो कि बड़े होकर पत्तियों के पूरे भाग को झुलसा देते हैं तथा इसके कारण ऊतक मर जाते हैं और हरा रंग नष्ट हो जाता है. इससे प्रकाश संश्लेषण बुरी तरह प्रभावित होता है. प्रभावित पौधे के बीजो में अंकुरण क्षमता कम होती है.
थायोफिनेट मिथाइल 70% W/P @ 300 ग्राम/एकड़ या कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोज़ेब 63% WP @ 300 ग्राम/एकड़ या हेक्साकोनाज़ोल 5% SC @ 400 मिली/एकड़ या टेबुकोनाज़ोल 10% + सल्फर 65% WG @ 500 ग्राम/एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 400 ग्राम/एकड़ या कासुगामायसिन 5% + कॉपर आक्सीक्लोराइड 45% WP @ 300 ग्राम/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें.जैविक उपचार के रूप में ट्रायकोडर्मा विरिडी @ 500 ग्राम/एकड़ या स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस @ 250 ग्राम/एकड़ की दर छिड़काव करें.