Name | Image | Stages | Periods | Symptoms |
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गन्ना | ![]() |
Vegetative Stage | बरसात के मौसम में अक्सर यह रोग देखने को मिलता है | | इस रोग की शुरुआत जमीन से लगे तने से होती है। इस रोग के होने पर पत्तियां पीली होने लगती हैं और जैसे-जैसे रोग बढ़ता है वैसे-वैसे पत्तियों और तने पर घाव जैसे दिखाई देने लगते हैं। तना अंदर से सड़ने लगता है और इससे दुर्गंध भी आती है। तने को फाड़ कर देखा जाए तो अंदर के भाग में चिपचिपा पदार्थ दिखाई देता है। |
तना सड़न रोग के लक्षण मुख्यतः पेड़ की स्तंभमूल संधि (तने-जड़ों का सन्धि स्थान) में पाये जाते हैं। रोग का संक्रमण जमीन से लगे तने के भाग से शुरू होकर जमीन के नीचे जड़ों में फैलता है। जमीन के पास तने की छाल में लाल व भूरे रंग के समान धब्बे बन जाते हैं। इसके उपरांत पेड़ की छाल भी नरम पड़ जाती है तथा स्पंज की तरह पिलपिली हो जाती है। बाद में तना गलकर कैंकर का रूप धारण कर लेता है। अगर रोग तने के चारों तरपफ फैल जाए तो पौधा मर जाता है। रोगग्रसित पौधों की पत्तियां पीली व उनकी शिराएं तथा किनारे लाल रंग के हो जाते हैं। बरसात के मौसम में रोगी पौधे की ऊपरी शाखाओं में हल्के बैंगनी लाल रंग की झलक वाली पत्तियां दिखाई पड़ती हैं, जिससे ग्रसित पौधे के पत्ते बगीचों में अलग ही दिखाई देने लगते हैं।
इस रोग की शुरुआत जमीन से लगे तने से होती है। इस रोग के होने पर पत्तियां पीली होने लगती हैं और जैसे-जैसे रोग बढ़ता है वैसे-वैसे पत्तियों और तने पर घाव जैसे दिखाई देने लगते हैं। तना अंदर से सड़ने लगता है और इससे दुर्गंध भी आती है। तने को फाड़ कर देखा जाए तो अंदर के भाग में चिपचिपा पदार्थ दिखाई देता है।
इस रोग से बचने के लिए खेत की मिट्टी को उपचारित करना आवश्यक है। इसके साथ ही खेती के लिए स्वस्थ बीज का चयन करना चाहिए। बीज को कवकनाशी से उपचरित करके बुवाई करना लाभदायक होता है। नाइट्रोजन की मात्रा संयमित रखें। इसे बहुत अधिक मात्रा में प्रयोग करने से बचें तथा पोटाश की मात्र सही रख कर मिट्टी का पी .एच स्तर अधिक रखें। करीब 10 से 15 दिनों के अंतराल पर हेक्साकोनाजोल 75 % डबल्यूजी या कार्बेन्डाजिम 50 % डबल्यूपी 3 ग्राम प्रति लीटर दवा का 1-2 बार छिड़काव करने से इस रोग से राहत मिलती है