खैरा रोग


Alternate / Local Name:
खैरा रोग

Short Description:
धान की फसल मे खैरा रोग जिंक की कमी के कारण होता है। धान की फसल में रोपाई के एक से दो सप्ताह बाद पौधों में खैरा रोग का प्रकोप होने लगता है। यह रोग पौधों में जिंक की कमी होने पर शीघ्रता से फैलता है
AFFECTED CROPS

Name Image Stages Periods Symptoms
धान Vegetative stages इस रोग का प्रकोप जुलाई से सितम्बर माह में अधिक होता है | इस रोग की पहचान करना आसान है। इसमें पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते हैं, जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते है। पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है।

अधिकतर किसानों ने धान की रोपाई कर ली है, फसल से अच्छा उत्पादन पाने के लिए सिर्फ सिंचाई व उर्वरकों की जरूरत तो होती ही है, साथ ही इस समय रोगों का प्रकोप भी बढ़ जाता है पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते हैं जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते है। पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है। प्रभावित पौधो की जडे भी कत्थई रंग की हो जाती है।

इस रोग की पहचान करना आसान है। इसमें पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते हैं, जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते है। पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है।

जिंक सल्फेट+बुझा हुआ चूना (100 ग्राम + 50 ग्राम) प्रति नाली की दर से 15 – 20 ली. पानी में घोलकर छिडकाव करें |