Name | Image | Stages | Periods | Symptoms |
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धान | ![]() |
Vegetative stages | इस रोग का प्रकोप जुलाई से सितम्बर माह में अधिक होता है | | इस रोग की पहचान करना आसान है। इसमें पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते हैं, जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते है। पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है। |
अधिकतर किसानों ने धान की रोपाई कर ली है, फसल से अच्छा उत्पादन पाने के लिए सिर्फ सिंचाई व उर्वरकों की जरूरत तो होती ही है, साथ ही इस समय रोगों का प्रकोप भी बढ़ जाता है पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते हैं जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते है। पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है। प्रभावित पौधो की जडे भी कत्थई रंग की हो जाती है।
इस रोग की पहचान करना आसान है। इसमें पत्तियो पर हल्के पीले रंग के धब्बे बनते हैं, जो बाद में कत्थई रंग के हो जाते है। पौधा बौना रह जाता है और व्यात कम होती है।
जिंक सल्फेट+बुझा हुआ चूना (100 ग्राम + 50 ग्राम) प्रति नाली की दर से 15 – 20 ली. पानी में घोलकर छिडकाव करें |