Name | Image | Stages | Periods | Symptoms |
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लहसुन | vegetative & reproductive stage | फरवरी एवं अप्रेल में इसका प्रक्रोप ज्यादा होता है। | इस रोग से संक्रमित पौधों के पत्तियों का रंग भूरा होने के साथ नरम हो जाता है तथा इससे सड़ा हुआ गंध निकलने लगता है। इस बीमारी का संक्रमण सबसे पहले पत्तियों, फूल और फलों पर लगता है तथा बाद में इन जगहों पर एक सफेद रंग का रूई जैसा संरचना बन जाता है। |
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि इस रोग के प्रबंधन के लिए यह आवश्यक है की किसान इन फसलों में ज्यादा सिंचाई न करें खासकर दोपहर में तो बिल्कुल भी न करें। इन फसलों में फूल आने के समय किसान एक कवकनाशी (साफ या कार्बेन्डाजिम दोनों में से कोई भी दवा 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ घोलकर फसलों पर छिड़काव करें।
इस रोग से संक्रमित पौधों के पत्तियों का रंग भूरा होने के साथ नरम हो जाता है तथा इससे सड़ा हुआ गंध निकलने लगता है। इस बीमारी का संक्रमण सबसे पहले पत्तियों, फूल और फलों पर लगता है तथा बाद में इन जगहों पर एक सफेद रंग का रूई जैसा संरचना बन जाता है।
मैकोजेब+कार्बेंडिज़म 2.5 ग्राम दवा के सममिश्रण से प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार कर बुआई करें। 2. मैकोजेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या कार्बेंडिज़म 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से कवनाशी दवा का 15 दिन के अंतराल पर दो बार छिडकाव करें। 3. रोग रोधी किस्म जैसे जी-50 , जी-1, जी 323 लगावें।