हल्दिया रोग


Alternate / Local Name:
आभासी कंड

Short Description:
आभासी कंड जैतुनी काले रंग के गोले में बदल जाते हैं | अनाज का वजन कम हो जाता है और आगे अंकुरण में भी समस्या आती है| इसका रोग जनक एक कवक अस्टीलैगो सेजेटम प्रजाति ट्रिटिसाई बीज के भ्रूण भाग में छिपा रहता है |
AFFECTED CROPS

Name Image Stages Periods Symptoms
धान flowering and fruiting इस रोग का प्रकोप जुलाई से सितम्बर माह में अधिक होता है | पौधों की बालियों में दानों की जगह रोग जनक के रोगकंड (स्पोर्स) काले पाउडर के रूप में पाये जाते हैं जो कि हवा से उड़कर अन्य स्वस्थ बालियों में बन रहे बीजों को भी संक्रमित कर देते हैं | इस प्रकार रोग आगे आने वाली फसल में पहुंच जाता है |

बालियों पर लगने वाली इस बीमारी को आम बोलचाल की भाषा में लेढ़ा रोग, गंडुआ रोग, बाली का पीला रोग/ हल्दी रोग, हरदिया रोग से किसान जानते है। वैसे अंग्रेजी में इस रोग को फाल्स स्मट और हिन्दी में मिथ्या आभासी कंड के नाम से जाना जाता है। आभासी कंड रोग की वजह से फसल उत्पादन पर असर पड़ता है, अनाज का वजन कम हो जाता है और आगे अंकुरण में भी समस्या आती है। ये रोग जहां उच्च आर्द्रता और 25-35 सेंटीग्रेड तापमान होता है वहां पर ज्यादा फैलता है, ये हवा के साथ एक खेत से दूसरे खेत उड़कर जाता है और फसल को संक्रमित कर देता है।

पौधों की बालियों में दानों की जगह रोग जनक के रोगकंड (स्पोर्स) काले पाउडर के रूप में पाये जाते हैं जो कि हवा से उड़कर अन्य स्वस्थ बालियों में बन रहे बीजों को भी संक्रमित कर देते हैं | इस प्रकार रोग आगे आने वाली फसल में पहुंच जाता है |

इस रोग कि रोकथाम के लिए रोग्र्स्त पौधों को उखाड़कर जला दें | बीजों को कार्बोक्सिन 75 डब्लू.पी. 1.5 ग्राम या कर्बेन्डाजिम 50 डब्लू.पी. 1.0 ग्राम या टेब्यूकोनाजोल 2.0 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से बीजोपचार कर बुवाई करें