Name | Image | Stages | Periods | Symptoms |
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चना | ![]() |
बिजाई के 20 दिन बाद किसी भी अवस्था में ये रोग का प्रकोप देखने को मिल सकता है | | वनस्पति या फ्रुटिंग अवस्था | चने की फसल में उकठा रोग फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम नामक फफूंद के कारण होता है। यह सामान्यतः मृदा तथा बीज जनित बीमारी है, जिसकी वजह से 10 से 12 प्रतिशत तक पैदावार में कमी आती है। इस रोग का प्रभाव खेत मे छोटे छोटे टुकड़ों मे दिखाई देता है। प्रारम्भ मे पौधे की ऊपरी पतियां मुरझा जाती हैं, धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखकर मर जाता है। |
मौसम में बदलाव और बार-बार खेत में एक ही फसल लगाने पर चने की फसल में उकठा रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में किसान सही प्रबंधन अपनाकर इससे छुटकारा पा सकते हैं।
चने की फसल में उकठा रोग फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम नामक फफूंद के कारण होता है। यह सामान्यतः मृदा तथा बीज जनित बीमारी है, जिसकी वजह से 10 से 12 प्रतिशत तक पैदावार में कमी आती है। इस रोग का प्रभाव खेत मे छोटे छोटे टुकड़ों मे दिखाई देता है। प्रारम्भ मे पौधे की ऊपरी पतियां मुरझा जाती हैं, धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखकर मर जाता है।
रोकथाम:- 1. चना उकठा रोग का प्रकोप कम करने के लिए तीन साल का फसल चक्र अपनाया जाना चाहिए। 7. सरसों या अलसी के साथ चना की अन्तर फसल लगाना चाहिए। 8. टेबुकोनाजोल 54% डब्ल्यू/डब्ल्यू एफएस @4.0 मिलीलीटर/10 किलोग्राम बीज के हिसाब से बीजोपचार करें। की बुवाई उचित समय यानि 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक करना चाहिए। 2. गर्मियों में मई से जून में गहरी जुताई करने से फ्यूजेरियम फफूंद का संवर्धन कम हो जाता है।