प्याज


Short Description:
प्याज़ एक प्रसिद्ध व्यापक सब्जी वाली प्रजाति है| इसको रसोई के कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता है| इसके इलावा इसके कड़वे रस के कारण इसे कीटों की रोकथाम, कांच और पीतल के बर्तनों को साफ करने के लिए और प्याज़ के घोल को कीट-रोधी के तौर पर पौधों पर स्प्रे करने के लिए प्रयोग किया जाता है| भारत प्याज़ की खेती में क्षेत्र के तौर पर दूसरे और उत्पादन के तौर पर चीन के बाद दूसरे स्थान पर है|

Climate:
बुवाई का तापमान-15-21°C कटाई का तापमान-20-30°C वर्षा-650-750mm

Soil Type:
इसकी खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट, चिकनी, गार और भरी मिट्टी में की जा सकती है| यह फसल गहरी दोमट और जलोढ़ मिट्टी, जिसका निकास प्रबंध बढ़िया, नमी को बरकरार रखने की समर्थता,जैविक तत्वों वाली मिट्टी में बढ़िया परिणाम देती है| विरली और रेतली मिट्टी इसकी खेती के लिए बढ़िया नहीं मानी जाती है, क्योंकि मिट्टी के घटिया जमाव और कम उपजाऊ-पन के कारण इस में गांठों का उत्पादन सही नहीं होता है| इसकी खेती के लिए मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए |
Soil Treatment:
इसके उपयोग के लिए 8 -10 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद लेते हैं तथा इसमें 2 किलो ट्राईकोडर्मा विरिडी और 2 किलो ब्यूवेरिया बेसियाना को मिला देते हैं एवं मिश्रण में नमी बनाये रखते हैं. यह क्रिया में सीधी धूप नहीं लगनी चाहिए. अतः इसे छाव या पेड़ के नीचे करते हैं. नियमित हल्का पानी देकर नमी बनाये रखना होता है | मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए तीन-चार बार गहराई से जोताई करें| मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए रूड़ी की खाद डालें| फिर खेत को छोटे-छोटे प्लाटों में बांट दें|

Seed Treatment:
उखेड़ा रोग और कांव-गियारी से बचाव के लिए थीरम 2 ग्राम+बेनोमाइल 50 डब्लयू पी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ प्रति किलो बीजों का उपचार करें|
Seed Rate:
एक एकड़ खेत की पनीरी तारे करने के लिए 3- 4 किलो बीजों की जरूरत होती है |

Time of Sowing:
नर्सरी तैयार करने के उचित समय मध्य-ऑक्टोबर से मध्य-नवबंर होता है| नए पौधे मध्य-दिसंबर से मध्य-जनवरी तक रोपाई के लिए तैयार हो जाते है| रोपाई के लिए 10-15 सैं.मी. कद के पौधे चुनें |
Method of Sowing:
बिजाई के लिए रोपाई विधि का प्रयोग करें |

Fertilizers :
बिजाई से 10 दिन पहले 20 टन रूड़ी की खाद डालें| नाइट्रोजन 40 किलो(यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) और पोटाश 20 किलो(मिउरेट ऑफ़ पोटाश 35 किलो) प्रति एकड़ डालें| फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय डालें| बाकि बची हीउ नाइट्रोजन टॉप ड्रेसिंग (मिट्टी में मिलाना) के तौर पर रोपण के चार हफ्ते बाद डालें| पानी में घुलनशील खादें: रोपण से 10-15 दिन बाद सूक्ष्म-तत्व 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ 19:19:19 की स्प्रे करें|
Water Requirements :
मिट्टी की किस्म और जलवायु के आधार पर सिंचाई की मात्रा और आवर्ती का फैसला करें| पहली सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद करें और फिर आवश्यकता अनुसार 10-15 दिनों के फासले पर सिंचाई करें|
Harvest Time:
सही समय पर कटाई करना बहुत जरूरी है| कटाई का सही समय, ऋतु, मंडी रेट आदि पर निर्भर करते है | पौधों के ऊपरी हिस्से का 50% नीचे गिरना दर्शाता है कि अब फसल पुटाई के लिए तैयार है| फसल की कटाई हाथों से प्याज़ को उखाड़ कर की जाती है| पुटाई के बाद प्याज़ों को 2-3 दिन के लिए अनावश्यक नमी को निकालने के लिए खेत को छोड़ दें |

Weeds:

Weeds Symptoms:

Weeds Management:
फसल को खरपतवारों से मुक्त रखने के लिए कुल 3 से 4 निराई-गुडाई की आवश्यकता होती है। प्याज के पौधे एक-दूसरे के नजदीक लगाये जाते है तथा इनकी जडे भी उथली रहती है अतः खरपतवार नष्ट करने के लिए रासायनिक पदार्थो का उपयोग किया जाना उचित होता है। दीनों के अंकुरण के उपरांत बिजाई से 7 दिन बाद ऑक्सीफ्लोफैन 425 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें|
Diseases:
1- बैंगनी धब्बा (परपल ब्लाॅच):

Diseases Symptoms:
1- बैंगनी धब्बा (परपल ब्लाॅच): इससे पत्तों पर जामुनी रंग के धब्बे पड़ जाते है| इसकी पीली धारियां भूरी हो जाती है और तीखी और लम्बी हो जाती है|

Diseases Management:
1- बैंगनी धब्बा (परपल ब्लाॅच) - इसकी रोकथाम के लिए प्रोपीनेब 70 % डब्लयू पी 350 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ 10 दिनों के फासले पर दो स्प्रे करें|
Insects / Pests:
1- थ्रिप्स 2- सुंडियां 3- माइट

Insects / Pests Symptoms:
1- थ्रिप्स: यह पत्तों का रस चूसते हैं, जिस कारण पत्ते मुड़ जाते है, कप के आकार के हो जाते है या ऊपर की तरफ मुड़ जाते हैं | 2- सुंडियां: आम-तौर पर इनका हमला जनवरी-फरवरी महीने में होता है| यह पौधे की जड़ों को खाते है, जिस कारण पत्ते भूरे हो जाते हैं| इससे पौधे का शिखर गीला रहने लग जाता है| 3- माइट: इस कीट के प्रकोप के कारण पत्तियों पर धब्बों का निर्माण हो जाता हैं और पौधे बौने रह जाते हैं।

Insects / Pests Management:
1- थ्रिप्स : अगर इनका हमला दिखाई दें तो फिपरोनिल (रीजेंट) 30 मि.ली. को प्रति 15 लीटर पानी में घोल कर स्प्रे करें, या प्रोफैनफोस 10 मि.ली. को प्रति 10 लीटर की स्प्रे 8-10 दिनों के फासले पर करें| 2- सुंडियां : यदि इसका हमला दिखाई दें तो कार्बरील 4 किलो या फोरेट 4 किलो मिट्टी में डालें और हल्की सिंचाई करें| सिंचाई वाले पानी या मिट्टी में मिलाकर क्लोरपाइरीफोस 1.5 लीटर प्रति एकड़ में डालें| 3- माइट : इसके नियंत्रण हेतु 0.05ः डाइमेथोएट दवा का छिड़काव करें।
Nutrients:

Nutrients Deficiency Symptoms:

Nutrients Deficiency Management: