लोबिया


Short Description:
लोबिया (बोड़ा) एक महत्वपूर्ण नगदी सब्जी की व्यावसायिक फसल है। लोबिया की खेती मैदानी क्षेत्रों में फरवरी से अक्टूबर तक सफलतापूर्वक की जाती है। लोबिया एक दलहनी पौधा है जिसमें पतली, लम्बी फलियाँ होती हैं। इन फलियों का उपयोग कच्ची अवस्था में सब्जी के रूप में किया जाता है। लोबिया की इन फलियों को बोड़ा चौला या चौरा की फलियों के नाम से भी जाना जाता है। लोबिया हरी फली, सूखे बीज, हरी खाद और चारे के लिए पूरे भारत में उगाई जाने वाली वार्षिक फसल है।

Climate:
लोबिया की खेती के लिए गर्म मौसम सबसे उपयुक्त होता है। लोबिया की खेती के लिए शुरुआत में बीजों को अंकुरित होने के लिए 20 डिग्री के आसपास तापमान की जरूरत होती है। अंकुरित होने के बाद इसके पौधे 35 डिग्री तापमान पर भी आसानी से विकास कर लेते है। लोबिया की खेती के लिए गर्म मौसम सबसे उपयुक्त होता है। लेकिन अधिक तेज गर्मी भी इसके पौधों के विकास और पैदावार को प्रभावित करती है।

Soil Type:
इसे मिट्टी की विभिन्न किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है।
Soil Treatment:
इसके उपयोग के लिए 8 -10 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद लेते हैं तथा इसमें 2 किलो ट्राईकोडर्मा विरिडी और 2 किलो ब्यूवेरिया बेसियाना को मिला देते हैं एवं मिश्रण में नमी बनाये रखते हैं. यह क्रिया में सीधी धूप नहीं लगनी चाहिए. अतः इसे छाव या पेड़ के नीचे करते हैं. नियमित हल्का पानी देकर नमी बनाये रखना होता है |

Seed Treatment:
बीज का उपचार बिजाई से पहले थीरम 2.5 ग्राम या कार्बेनडाज़िम 50 प्रतिशत डब्लयु पी 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें। इससे बीज को बीज गलन और नए पौधों को मरने से बचाया जा सकता है।
Seed Rate:
12 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें। TA 5269 किस्म के लिए 8 किलो बीज जबकि TA 2 किस्म के लिए 16 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।

Time of Sowing:
बिजाई का समय लोबिया की बिजाई का उपयुक्त समय मॉनसून के शुरू होने पर है। जुलाई के महीने में बिजाई पूरी कर लें।
Method of Sowing:
फासला बिजाई के दौरान कतार से कतार में 45-50 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 15 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। TA 2 किस्म के लिए कतारों में 45-50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। जबकि TA 5269 किस्म के लिए कतारों में 50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। बिजाई का ढंग दानों के लिए, बीजों को पोरा या सीड कम खाद ड्रिल की सहायता से बोयें, जबकि हरी खाद के लिए बुरकाव विधि का प्रयोग करें।

Fertilizers :
बिजाई से पहले नाइट्रोजन 7.5 किलो (यूरिया 16.5 किलो) के साथ फासफोरस 20 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें। लोबिया की फसल फासफोरस खाद के साथ ज्यादा क्रिया करती है। यह जड़ों के साथ साथ पौधे के विकास, पौधे में पोषक तत्वों की वृद्धि और गांठे मजबूत करने में सहायक होती है।
Water Requirements :
बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें। लंबी अवधि तक बारिश ना होने पर 1-2 सिंचाई करें।
Harvest Time:
लोबिया की खेती के प्रकार के अनुसार कटाई-मड़ाई की जाती है दाने के लिए पूर्ण रूप से फली एवं पेड़ सूखने पर कटाई करते है तथा बाद में मड़ाई करके दाना अलग कर लिया जाता हैI फलियों के लिए जब फलियां खाने लायक हो जावे तो हर सप्ताह तुड़ाई करके बाजार में बेच देना चाहिए और हरे चारे हेतु जब फसल में अच्छी बढ़त हो जावे तभी चारे हेतु कटाई शुरू कर देनी चाहिएI

Weeds:

Weeds Symptoms:

Weeds Management:
फसल को नदीनों से बचाने के लिए 24 घंटों के अंदर अंदर पैंडीमैथालीन 750 मि.ली. को 200 लीटर पानी में मिलाकर डालें।
Diseases:
1- बीज गलन और पौधों का नष्ट होना - 2- जीवाणु झुलसा - 3- लोबिया मोजैक -

Diseases Symptoms:
1- बीज गलन और पौधों का नष्ट होना - प्रभावित बीज सिकुड़ जाते हैं और बेरंग हो जाते हैं। प्रभावित बीज अंकुरण होने से पहले ही मर जाते हैं। 2- जीवाणु झुलसा - रोग के लक्षण व प्रकोप प्रारंभिक दशा में बड़े पैमाने पर नवजात पौधों में देखनें को मिलता हैं। 3- लोबिया मोजैक - रोग के लक्षण व प्रकोप प्रारंभिक दशा में बड़े पैमाने पर नवजात पौधों में देखनें को मिलता हैं।

Diseases Management:
1- बीज गलन और पौधों का नष्ट होना - इसकी रोकथाम के लिए बुवाई से पहले थीरम दवा 2.5 ग्राम या बवास्टिन 50 डब्ल्यू पी 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें। 2- जीवाणु झुलसा - इसकी रोकथाम के लिए 3 ग्राम प्रति लीटर ब्लाईटाक्स का छिडक़ाव करें। 3- लोबिया मोजैक - इसकी रोकथाम के लिए 3 ग्राम प्रति लीटर मेटासिस्टॉक्स या डाइमेथोएट का छिडक़ाव 10 दिन के अन्तराल पर करें।
Insects / Pests:
1- रोमिल सूंडी कीट - 2- तेला और काला चेपा - 3- लीफ होपर, जैसिड, एफिड -

Insects / Pests Symptoms:
1- रोमिल सूंडी कीट - यह लोबिया का प्रमुख कीट है। यह फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है, इस कीट का ज्यादा हमला अगस्त से नवंबर के महीने में होता है। 2- तेला और काला चेपा - ये कीट लोबिया की फसल के फल पर तथा पत्तों पर होते हैं। ये जिस फसल में इनका प्रभाव होता है उस फसल के पत्ते चिपचिपे व तेलिए तथा काले रंग के होने शुरू हो जाते हैं। 3- लीफ होपर, जैसिड, एफिड - ये कीट पौधे के रस को चूसकर उसे पीला व कमजोर कर देते है।

Insects / Pests Management:
1- रोमिल सूंडी कीट - मैलाथियान 50 ईसी या एंडोसल्फास 35 ईसी 1 से 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। 2- तेला और काला चेपा - मैलाथियॉन 50 ई सी 200-300 मि.ली. को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में डालें। 3- लीफ होपर, जैसिड, एफिड - इसकी रोकथाम के लिए डाईमेथोएट 30 ई.सी. या मिथाइल डिमेटान 30 ई.सी. की 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें।
Nutrients:

Nutrients Deficiency Symptoms:

Nutrients Deficiency Management: